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क्या बौद्ध धर्म में मांस खाना स्वीकार्य है? तीन शुद्ध मांस, महायान और वज्रयान की व्याख्या
पाठ की अवधि: 54:29
मांस खाने के दोष 📍 स्थान: लारुंग गर बौद्ध विद्यापीठ, चीन 🎤 व्याख्याता: खेनपो सोदरग्ये 🗓️ तिथि: 16 अप्रैल 2008 ⏱️ समय चिह्न / विवरण इस व्याख्यान में, खेनपो सोदरग्ये महायान बौद्ध धर्म की दृष्टि से मांस खाने के गंभीर दोषों पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं। वे स्पष्ट करते हैं कि महायान बोधिचित्त का आधार 'महाकरुणा' है, और मांस खाना उस करुणा के बीज को नष्ट कर देता है। लंकावतार सूत्र और अवतंसक सूत्र जैसे महान ग्रंथों के माध्यम से वे समझाते हैं कि संसार के सभी प्राणी कभी न कभी हमारे माता-पिता रहे हैं, इसलिए उनका मांस खाना अपने ही परिजनों का मांस खाने के समान है। खेनपो जी ने वज्रयान (तंत्र) में मांस से जुड़ी भ्रांतियों का भी निवारण किया है, यह स्पष्ट करते हुए कि सूक्ष्म साधनाओं में मांस का उल्लेख प्रतीकात्मक है और यह साधारण व्यक्तियों के लिए मांस खाने का बहाना नहीं हो सकता। इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्वास्थ्य, पोषण और आधुनिक विज्ञान के तर्कों से भी शाकाहार की श्रेष्ठता सिद्ध की है। व्याख्यान का समापन सभी साधकों को शाकाहार अपनाने और प्राणियों के प्रति अहिंसा का भाव रखने की प्रेरणा के साथ होता है। 🗓️ 2008416 🤖 AI सामग्री सूचना AI हिन्दी अनुवाद एवं लिप-सिंक AI द्वारा निर्मित हैं। व्याख्यान की विषयवस्तु एवं फ़िल्मांकन स्थल पूर्णतः प्रामाणिक हैं। AI 🏷️ Tags 📚 उद्धृत ग्रंथ / ब्रह्मजाल सूत्र / अवतंसक सूत्र / लंकावतार सूत्र / शूरंगम सूत्र / निर्वाण सूत्र / बुद्धनाम सूत्र / दशकुशल शील सूत्र / महाप्रज्ञापारमिता शास्त्र / 🔔 सब्सक्राइब करें / 👍 लाइक और शेयर करें / 💬 अपने सवाल कमेंट करें /

Khenpo Sodargye
प्रशिक्षक
स्तर
आसान
CMS स्तर कोड: beginner
विस्तार
7 पाठ · 4 घंटे
प्रकाशित
10 अग॰ 2026
रेटिंग
4.8 / 5 (5 में से)