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पशु हमारे मित्र हैं या हमारा भोजन? क्या मनुष्य को पशुओं को खाने का अधिकार है?
पाठ की अवधि: 21:04
पशु, हमारे मित्र 📍 स्थान: लारुंग पंचविद्या बौद्ध विद्यापीठ 🎤 व्याख्याता: खेनपो सोदरग्ये 🗓️ तिथि: 4 अप्रैल 2015 ⏱️ समय चिह्न / विवरण यह प्रवचन लारुंग पंचविद्या बौद्ध विद्यापीठ में खेनपो सोदरग्ये द्वारा दिया गया है, जिसमें उन्होंने "पशु, हमारे मित्र" विषय पर गहराई से चर्चा की है। उन्होंने इस आम धारणा का खंडन किया कि पशु केवल मानव उपभोग के साधन हैं। इसके बजाय, उन्होंने स्पष्ट किया कि पशु भी मनुष्यों की तरह भूख, प्यास, भय और पीड़ा का अनुभव करते हैं। सीज़र चावेज़ और जॉर्ज बर्नार्ड शॉ जैसे प्रसिद्ध विचारकों के साथ-साथ महायान बौद्ध धर्म के 'शूरंगम सूत्र' का उदाहरण देते हुए, उन्होंने सभी जीवों के प्रति समानता और करुणा की वकालत की। अपने बचपन में याक चराने के मार्मिक संस्मरण और वधशालाओं के क्रूर दृश्यों का उल्लेख करते हुए, खेनपो ने आधुनिक पशुपालन उद्योग की छिपी हुई सच्चाई को उजागर किया। उन्होंने बोवेन और एक आवारा बिल्ली की कहानी के माध्यम से समझाया कि कैसे मनुष्य और पशु एक-दूसरे के घावों को भर सकते हैं। उन्होंने अपनी पुस्तक 'दुखमय संसार' (जिसे बाद में 'जीवन के प्रति सद्भाव' नाम दिया गया) का भी संदर्भ दिया, जो पशुओं की पीड़ा को बयां करती है। व्याख्यान के अंत में, खेनपो सोदरग्ये ने चंद्र ग्रहण के शुभ अवसर पर श्रोताओं को तीन महत्वपूर्ण कार्य दिए: वर्ष 2015 में कम से कम एक प्राणी को मुक्त करना, एक दिन शाकाहारी भोजन करना, और 24 घंटे के भीतर अवलोकितेश्वर के हृदय मंत्र 'ॐ मणि पद्मे हूँ' का 108 बार पाठ करना। यह प्रवचन हमें प्रत्येक जीवन का सम्मान करने और करुणापूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है। 🗓️ : 20150404 201524108 🤖 AI सामग्री सूचना AI हिन्दी अनुवाद एवं लिप-सिंक AI द्वारा निर्मित हैं। व्याख्यान की विषयवस्तु एवं फ़िल्मांकन स्थल पूर्णतः प्रामाणिक हैं। AI 🏷️ Tags 📚 उद्धृत ग्रंथ / शूरंगम सूत्र / महायानसूत्रालंकार / बोधिचर्यावतार / जीवन के प्रति सद्भाव (दुखमय संसार) / 🔔 सब्सक्राइब करें / 👍 लाइक और शेयर करें / 💬 अपने सवाल कमेंट करें /

Khenpo Sodargye
प्रशिक्षक
स्तर
आसान
CMS स्तर कोड: beginner
विस्तार
7 पाठ · 4 घंटे
प्रकाशित
10 अग॰ 2026
रेटिंग
4.8 / 5 (5 में से)