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क्या शत्रु और पौधों के प्रति भी करुणा रखनी चाहिए? Harvard University में का प्रश्नोत्तर
पाठ की अवधि: 11:07
प्रश्नोत्तर सत्र 📍 स्थान: हार्वर्ड विश्वविद्यालय, बोस्टन, अमेरिका 🎤 व्याख्याता: खेनपो सोदरग्ये 🗓️ तिथि: 17 अप्रैल 2013 ⏱️ समय चिह्न / विवरण यह वीडियो हार्वर्ड विश्वविद्यालय में खेनपो सोदरग्ये के व्याख्यान के बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र को प्रस्तुत करता है। इस सत्र में विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं ने बौद्ध धर्म के व्यावहारिक और दार्शनिक पहलुओं पर अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे। मुख्य चर्चा के विषयों में शत्रुओं के प्रति करुणा का विकास, वनस्पतियों और पशुओं के जीवन में अंतर, और प्रज्ञा व करुणा के बीच का अविभाज्य संबंध शामिल था। खेनपो ने स्पष्ट किया कि करुणा के बिना प्रज्ञा विनाशकारी हो सकती है, और प्रज्ञा के बिना करुणा केवल एक साधारण भलाई बनकर रह जाती है। इसके अतिरिक्त, खेनपो ने पश्चिमी अकादमिक शोध और बौद्ध धर्म की वास्तविक साधना के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया। उन्होंने समझाया कि केवल सैद्धांतिक ज्ञान समाज का वास्तविक कल्याण नहीं कर सकता, इसके लिए ज्ञान को आचरण में उतारना आवश्यक है। अपने समुदाय की सहायता के लिए नेतृत्व की आकांक्षा और स्वार्थपूर्ण वासना के बीच के सूक्ष्म अंतर को स्पष्ट करते हुए उन्होंने आत्म-निरीक्षण का महत्व बताया। यह सत्र आधुनिक जीवन और शिक्षा में बोधिचित्त को लागू करने की एक अत्यंत स्पष्ट और व्यावहारिक दिशा प्रदान करता है। 🗓️ : 20130417 🤖 AI सामग्री सूचना AI हिन्दी अनुवाद एवं लिप-सिंक AI द्वारा निर्मित हैं। व्याख्यान की विषयवस्तु एवं फ़िल्मांकन स्थल पूर्णतः प्रामाणिक हैं। AI 🏷️ Tags 📚 उद्धृत ग्रंथ / बोधिचर्यावतार / शूरंगम सूत्र / 🔔 सब्सक्राइब करें / 👍 लाइक और शेयर करें / 💬 अपने सवाल कमेंट करें /

Khenpo Sodargye
प्रशिक्षक
स्तर
आसान
CMS स्तर कोड: beginner
विस्तार
11 पाठ · 0 घंटे 18 मि
प्रकाशित
2 जुल॰ 2026
रेटिंग
4.8 / 5 (5 में से)