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बुद्ध भिक्षा माँगने क्यों जाते थे? चीनी अनुवादित वज्रसूत्र की व्याख्या दूसरा पाठ Dorjey Chöpa
बुद्ध भिक्षा माँगने क्यों जाते थे? चीनी अनुवादित वज्रसूत्र की व्याख्या दूसरा पाठ Dorjey Chöpa
पाठ की अवधि: 17:51
[वज्रच्छेदिका प्रज्ञापारमिता सूत्र (वज्रसूत्र) का प्रवचन - भाग 2] 📍 स्थान: लारुंग पंचविद्या बौद्ध अकादमी 🎤 व्याख्याता: खेनपो सोदरग्ये ⏱️ समय चिह्न / विवरण इस भाग में खेनपो सोदरग्ये वज्रच्छेदिका प्रज्ञापारमिता सूत्र (वज्रसूत्र) की भूमिका और उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की गहरी व्याख्या करते हैं। वे आरंभ में 'वज्रसूत्र पुण्य सूत्र' से दो रोचक कथाएं सुनाते हैं। पहली कथा में एक श्रामणेर वज्रसूत्र के पाठ मात्र से एक अत्यंत विनाशकारी अमानुष (भूत) को वश में कर लेता है, जबकि दूसरी कथा में सुन नामक एक व्यक्ति पहाड़ के नीचे दबने के 12 वर्ष बाद भी केवल वज्रसूत्र के प्रभाव और एक चमत्कारी रोटी के कारण जीवित पाया जाता है। इसके पश्चात, खेनपो सूत्र के प्रारंभिक वचनों की व्याख्या करते हैं, जिसमें पांच पूर्णताओं (स्थान, समय, सभा, धर्म और गुरु) का उल्लेख है। वे श्रावस्ती के जेतवन (अनाथपिण्डिक उद्यान) के इतिहास और उसके आध्यात्मिक महत्व को विस्तार से समझाते हैं। शाक्यमुनि बुद्ध की दिनचर्या का वर्णन करते हुए, खेनपो स्पष्ट करते हैं कि बुद्ध को भूख या भिक्षाटन की कोई आवश्यकता नहीं थी; यह केवल प्राणियों को पुण्य संचित करने और धर्म सिखाने का एक उपाय था। अंत में, वे थाईलैंड की भिक्षाटन परंपरा का उल्लेख करते हैं और श्रोताओं को ध्यान तथा धर्मग्रंथों के अध्ययन के समय शरीर को सीधा रखने और उचित मुद्रा बनाए रखने का महत्वपूर्ण निर्देश देते हैं, जो आध्यात्मिक ऊर्जा (वायु और नाड़ी) के लिए अत्यंत आवश्यक है। [ - ] 12 🤖 AI सामग्री सूचना AI हिन्दी अनुवाद एवं लिप-सिंक AI द्वारा निर्मित हैं। व्याख्यान की विषयवस्तु एवं फ़िल्मांकन स्थल पूर्णतः प्रामाणिक हैं। AI 🏷️ Tags 📚 उद्धृत ग्रंथ / वज्रसूत्र पुण्य सूत्र / अभिसमयालंकार / सुवर्णप्रभास सूत्र / बोधिचर्यावतार / 🔔 सब्सक्राइब करें / 👍 लाइक और शेयर करें / 💬 अपने सवाल कमेंट करें /

Khenpo Sodargye
प्रशिक्षक
स्तर
चुनौतीपूर्ण
CMS स्तर कोड: advanced
विस्तार
5 पाठ · 1 घंटे 1 मि
प्रकाशित
1 सित॰ 2026
रेटिंग
4.8 / 5 (5 में से)