लोड हो रहा है...
लोड हो रहा है...
पाठ लोड हो रहा है...
एक फूल में एक संसार, फिर भी चारों महाभूत शून्य — यह विरोध नहीं है! खेनपो सोदरग्ये से प्रश्न
एक फूल में एक संसार, फिर भी चारों महाभूत शून्य — यह विरोध नहीं है! खेनपो सोदरग्ये से प्रश्न
पाठ की अवधि: 4:38
🇮🇳 हिन्दी प्रत्यक्ष संवाद: हृदय सूत्र और बौद्ध धर्म के गूढ़ प्रश्न 📍 स्थान: स्वीडन स्टॉकहोम ABF भवन का व्याख्यान कक्ष 🎤 व्याख्याता: सोदरग्ये खेनपो रिनपोछे 🗓️ तिथि: 26 नवंबर 2017 विवरण यह सत्र स्वीडन के स्टॉकहोम में सोदरग्ये खेनपो रिनपोछे के मुख्य व्याख्यान के बाद आयोजित एक जीवंत प्रश्नोत्तर सत्र (प्रत्यक्ष संवाद) है। इसमें श्रोताओं ने बौद्ध धर्म के गूढ़ सिद्धांतों और विभिन्न परंपराओं के तुलनात्मक अध्ययन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे, जिनका रिनपोछे ने अत्यंत सरलता और गहराई से उत्तर दिया। खेनपो ने कर्म (कारण और फल) और अनित्यता के बीच संबंधों को स्पष्ट करते हुए इसे 'प्रतीत्यसमुत्पाद के बारह अंगों' (Twelve Links of Dependent Origination) के माध्यम से समझाया। उन्होंने बताया कि बाहरी प्राकृतिक परिवर्तनों और आंतरिक मानसिक कर्मों में यद्यपि अनित्यता है, फिर भी कारण और फल का अचूक नियम निरंतर कार्य करता है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने थाई बौद्ध धर्म (दक्षिणी परंपरा) और तिब्बती बौद्ध धर्म के बीच की समानताओं और आपसी सहयोग के अवसरों पर भी अपना दृष्टिकोण साझा किया। अंत में, "चारों महाभूत शून्य हैं" (Emptiness) और "एक फूल में एक संसार" (Manifestation) के बीच स्पष्ट विरोधाभास को दूर करते हुए, खेनपो ने स्पष्ट किया कि परमार्थ सत्य के स्तर पर सब कुछ शून्य है, जबकि संवृति सत्य (व्यावहारिक वास्तविकता) में सभी धर्म मायावी रूप से अचूक विद्यमान हैं। इन दोनों के बीच कोई टकराव नहीं है, जो कि हृदय सूत्र का भी मुख्य संदेश है। ⏱️ समय चिह्न 🇨🇳 📍 : ABF 🗓️ : 20171126 🏷️ Tags 📚 उद्धृत ग्रंथ / थाईलैंड यात्रा वृत्तांत / प्रतीत्यसमुत्पाद / प्रज्ञापारमिता हृदय सूत्र / 🔔 सब्सक्राइब करें / 👍 लाइक और शेयर करें / 💬 अपने सवाल कमेंट करें /

Khenpo Sodargye
प्रशिक्षक
स्तर
आसान
CMS स्तर कोड: beginner
विस्तार
5 पाठ · 0 घंटे 18 मि
प्रकाशित
2 जुल॰ 2026
रेटिंग
4.8 / 5 (5 में से)