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आस्था और प्रज्ञा के बिना बौद्ध धर्म को समझना क्यों कठिन है? National University of Singapore
आस्था और प्रज्ञा के बिना बौद्ध धर्म को समझना क्यों कठिन है? National University of Singapore
पाठ की अवधि: 33:20
बौद्ध धर्म और आस्था — स्वप्नवत जीवन 📍 स्थान: सिंगापुर का राष्ट्रीय विश्वविद्यालय 🎤 व्याख्याता: खेनपो सोदरग्ये 🗓️ तिथि: 19 जुलाई 2016 ⏱️ समय चिह्न / विवरण इस विशेष व्याख्यान में पूज्य खेनपो सोदरग्ये ने सिंगापुर राष्ट्रीय विश्वविद्यालय की बौद्ध अध्ययन संस्था के आमंत्रण पर "बौद्ध धर्म और आस्था — स्वप्नवत जीवन" विषय पर सारगर्भित उद्बोधन दिया। वर्तमान सूचना और इंटरनेट क्रांति के युग में आधुनिक युवा पढ़ाई, भावनात्मक संबंधों और आजीविका के भारी दबावों का सामना कर रहे हैं। खेनपो जी ने स्पष्ट किया कि बिना सच्ची आस्था और नैतिक अनुशासन के मनुष्य स्वच्छंद होकर अपराधों एवं मानसिक अशांति की ओर प्रवृत्त हो सकता है। 'महापरिनिर्वाण सूत्र' और 'फायुआन झूलिन' के संदर्भों से उन्होंने रेखांकित किया कि परलोक और कर्म-फल में विश्वास ही व्यक्ति के आचरण को मर्यादित रखता है। बौद्ध दर्शन की तार्किक श्रेष्ठता प्रतिपादित करते हुए उन्होंने बताया कि बौद्ध धर्म केवल श्रद्धा का नहीं, अपितु गहन प्रज्ञा का मार्ग है। आधुनिक विज्ञान, क्वांटम भौतिकी (जॉन व्हीलर, नील्स बोहर) और आइंस्टीन के विचारों के समानांतर बौद्ध दृष्टिकोण को रखते हुए उन्होंने आचार्य नागार्जुन तथा राजगुरु छिंगल्यांग के वचनों से समझाया कि "श्रद्धा प्रवेश का द्वार है और प्रज्ञा पार लगाने वाली नौका है।" अफ्रीकी लिश्या पक्षी के भारी घोंसले के टूटने के रोचक दृष्टांत द्वारा साधना में प्रारंभिक आधार (पूर्वंग/) की सुदृढ़ता पर बल दिया गया। साथ ही विशुद्ध श्रद्धा, अभिलाषामयी श्रद्धा और अविनिवर्तनीय श्रद्धा के स्वरूप तथा संवृति व परमार्थ सत्य के अद्वैत रहस्य का उद्घाटन किया गया। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और बौद्ध संगठनों को व्यावहारिक दिशा देते हुए खेनपो जी ने आध्यात्मिक उन्नति के तीन सोपान प्रस्तुत किए: प्रथम, संवादात्मक गोष्ठियों और ध्यान द्वारा 'शरीर और चित्त का स्वास्थ्य'; द्वितीय, अनित्यता, कर्म-फल और दुःख को समझकर 'जीवन को पहचानना'; तथा तृतीय, अपने चित्त के मूल स्वभाव का साक्षात्कार कर 'मोक्ष का अनुभव करना' (क्लेश ही बोधि है)। अंत में अवतंसक सूत्र के अमर श्लोक के माध्यम से उन्होंने सभी को अंधविश्वास त्यागकर सम्यक् प्रज्ञा से युक्त अडिग श्रद्धा विकसित करने और स्वप्नवत जीवन के सत्य को जानकर जगत-कल्याण में प्रवृत्त होने की प्रेरणा दी। 🗓️ :2016719 🤖 AI सामग्री सूचना AI हिन्दी अनुवाद एवं लिप-सिंक AI द्वारा निर्मित हैं। व्याख्यान की विषयवस्तु एवं फ़िल्मांकन स्थल पूर्णतः प्रामाणिक हैं। AI 🏷️ Tags 📚 उद्धृत ग्रंथ / 'महापरिनिर्वाण सूत्र' / 'फायुआन झूलिन' (धर्मोद्यान-मणिशेखर) / आचार्य नागार्जुन-विरचित 'महाप्रज्ञापारमिता शास्त्र' / आचार्य नागार्जुन-विरचित 'रत्नावली' (मध्यमक-रत्नावली) / आचार्य नागार्जुन-विरचित 'मूलमध्यमककारिका' (मध्यमक मूल शास्त्र) / 'अवतंसक सूत्र' (महावैपुल्य बुद्ध अवतंसक सूत्र) / 🔔 सब्सक्राइब करें / 👍 लाइक और शेयर करें / 💬 अपने सवाल कमेंट करें /

Khenpo Sodargye
प्रशिक्षक
स्तर
आसान
CMS स्तर कोड: beginner
विस्तार
11 पाठ · 0 घंटे 28 मि
प्रकाशित
2 जुल॰ 2026
रेटिंग
4.8 / 5 (5 में से)