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केवल श्रद्धा रखो तो मैं उपस्थित हूं” — गुरु पद्मसंभव की अद्भुत कथा
पाठ की अवधि: 6:53
इस वीडियो में हम गुरु पद्मसंभव के अद्भुत जीवन, ऐतिहासिक अस्तित्व और तिब्बती बौद्ध धर्म में उनके महान योगदान को समझेंगे। वे केवल एक पौराणिक पात्र नहीं, बल्कि 8वीं शताब्दी में उड्डियान देश से तिब्बती क्षेत्र में पधारे एक महान गुरु थे। उन्होंने सम्ये विहार की स्थापना में मार्गदर्शन दिया, तिब्बती बौद्ध धर्म की नींव रखी, अनेक शिष्यों को तैयार किया, तेरमा शिक्षाओं को छिपाया और करुणा व प्रज्ञा से बाधाओं को धर्मपालों में परिवर्तित किया। तिब्बती परंपरा में उन्हें “द्वितीय बुद्ध” कहा जाता है। जैसा कि गुरु पद्मसंभव ने कहा मेरा न आना है न जाना, केवल श्रद्धा रखो तो मैं उपस्थित हूं। आज भी भक्त मानते हैं आप जपें तो वे हैं, आप श्रद्धा रखें तो वे कभी नहीं गए।

Khenpo Sodargye
प्रशिक्षक
स्तर
आसान
CMS स्तर कोड: beginner
विस्तार
42 पाठ · 10 घंटे 51 मि
प्रकाशित
3 जून 2026
रेटिंग
4.8 / 5 (5 में से)