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बौद्ध ग्रंथों का अनुवाद: सांस्कृतिक उद्धार या सांस्कृतिक विनाश? ऑक्सफोर्ड में प्रश्नोत्तर सत्र
पाठ की अवधि: 13:32
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्रश्नोत्तर सत्र: तिब्बती संस्कृति, आधुनिकता और बौद्ध धर्म 📍 स्थान: ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, ब्रिटेन 🎤 खेनपो सोदरग्ये 🗓️ तिथि: 13 अक्टूबर 2015 विवरण यह वीडियो 13 अक्टूबर 2015 को ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में खेनपो सोदरग्ये द्वारा आयोजित एक अत्यंत ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तर सत्र को प्रस्तुत करता है। इस सत्र में मुख्य रूप से तिब्बती संस्कृति के संरक्षण, बौद्ध ग्रंथों के अनुवाद और आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक संस्कृति के संतुलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई है। खेनपो स्पष्ट करते हैं कि बौद्ध धर्म का ज्ञान किसी एक भाषा या जाति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी प्राणियों के कल्याण के लिए है, इसलिए ग्रंथों का अनुवाद अत्यंत आवश्यक और लाभकारी है। इसके अलावा, खेनपो चीनी क्षेत्रों में धर्म प्रचार की चुनौतियों और आधुनिक युग में युवाओं द्वारा अपनी मातृभाषा के अर्थ से दूर होने की चिंताओं का उत्तर देते हैं। वे करुणा और बोधिचित्त के बीच के कारण-परिणाम संबंध को स्पष्ट करते हैं और पश्चिमी दुनिया में पुनर्जन्म तथा 'बर्दो' (अंतराल अवस्था) की अवधारणाओं को समझाने के लिए गुरु पद्मसंभव की शिक्षाओं का संदर्भ देते हैं। यह चर्चा आधुनिक परिप्रेक्ष्य में प्राचीन ज्ञान की प्रासंगिकता को गहराई से स्थापित करती है। 🗓️ : 20151013 20151013 ⏱️ समय चिह्न / 🤖 AI सामग्री सूचना AI हिन्दी अनुवाद एवं लिप-सिंक AI द्वारा निर्मित हैं। व्याख्यान की विषयवस्तु एवं फ़िल्मांकन स्थल पूर्णतः प्रामाणिक हैं। AI 🏷️ Tags 📚 उद्धृत ग्रंथ / बर्दो थोडोल (श्रवण मुक्ति की साधना पद्धति) / 🔔 सब्सक्राइब करें / 👍 लाइक और शेयर करें / 💬 अपने सवाल कमेंट करें /

Khenpo Sodargye
प्रशिक्षक
स्तर
आसान
CMS स्तर कोड: beginner
विस्तार
22 पाठ · 10 घंटे 51 मि
प्रकाशित
3 जून 2026
रेटिंग
4.8 / 5 (5 में से)